श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—भगवान् कपिलके इस प्रकार कहनेपर प्रजापति कर्दमजी उनकी परिक्रमा कर प्रसन्नतापूर्वक वनको चले गये॥ ४१॥✎ 311
एवं समुदितस्तेन कपिलेन प्रजापतिः।
दक्षिणीकृत्य तं प्रीतो वनमेव जगाम ह॥ ४१
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—भगवान् कपिलके इस प्रकार कहनेपर प्रजापति कर्दमजी उनकी परिक्रमा कर प्रसन्नतापूर्वक वनको चले गये॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 356) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#311 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् की → श्रीभगवान्की