देवहूतिका प्रश्न तथा भगवान् कपिलद्वारा भक्तियोगकी महिमाका वर्णन
शौनक उवाच
कपिलस्तत्त्वसंख्याता भगवानात्ममायया।
जातः स्वयमजः साक्षादात्मप्रज्ञप्तये नृणाम्॥ १
kapilastattvasaṃkhyātā bhagavānātmamāyayā|
jātaḥ svayamajaḥ sākṣādātmaprajñaptaye nṛṇām|| 1
अर्थ
शौनकजीने पूछा—सूतजी! तत्त्वोंकी संख्या करनेवाले भगवान् कपिल साक्षात् अजन्मा नारायण होकर भी लोगोंको आत्मज्ञानका उपदेश करनेके लिये अपनी मायासे उत्पन्न हुए थे॥ १॥
कपिलस्तत्त्वसंख्याता भगवानात्ममायया।
जातः स्वयमजः साक्षादात्मप्रज्ञप्तये नृणाम्॥ १
शौनकजीने पूछा—सूतजी! तत्त्वोंकी संख्या करनेवाले भगवान् कपिल साक्षात् अजन्मा नारायण होकर भी लोगोंको आत्मज्ञानका उपदेश करनेके लिये अपनी मायासे उत्पन्न हुए थे॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 357) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/1/