॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.26.14
मनो बुद्धिरहङ्कारश्चित्तमित्यन्तरात्मकम्।
चतुर्धा लक्ष्यते भेदो वृत्त्या लक्षणरूपया॥ १४
mano buddhirahaṅkāraścittamityantarātmakam|
caturdhā lakṣyate bhedo vṛttyā lakṣaṇarūpayā|| 14
अर्थ
मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार—इन चारके रूपमें एक ही अन्तःकरण अपनी संकल्प, निश्चय, चिन्ता और अभिमानरूपा चार प्रकारकी वृत्तियोंसे लक्षित होता है॥ १४॥✎ 318