श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.15

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

एतावानेव सङ्ख्यातो ब्रह्मणः सगुणस्य ह।

सन्‍निवेशो मया प्रोक्तो यः कालः पंचविंशकः॥ १५

etāvāneva saṅkhyāto brahmaṇaḥ saguṇasya ha|

sanniveśo mayā prokto yaḥ kālaḥ paṃcaviṃśakaḥ|| 15

अर्थ

इस प्रकार तत्त्वज्ञानी पुरुषोंने सगुण ब्रह्मके सन्‍निवेशस्थान इन चौबीस तत्त्वोंकी संख्या बतलायी है। इनके सिवा जो काल है, वह पचीसवाँ तत्त्व है॥ १५॥✎ 318

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #318 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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