इस प्रकार तत्त्वज्ञानी पुरुषोंने सगुण ब्रह्मके सन्निवेशस्थान इन चौबीस तत्त्वोंकी संख्या बतलायी है। इनके सिवा जो काल है, वह पचीसवाँ तत्त्व है॥ १५॥✎ 318
एतावानेव सङ्ख्यातो ब्रह्मणः सगुणस्य ह।
सन्निवेशो मया प्रोक्तो यः कालः पंचविंशकः॥ १५
इस प्रकार तत्त्वज्ञानी पुरुषोंने सगुण ब्रह्मके सन्निवेशस्थान इन चौबीस तत्त्वोंकी संख्या बतलायी है। इनके सिवा जो काल है, वह पचीसवाँ तत्त्व है॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.26.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 363) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/26/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#318 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने