svarūpaṃ bata kurvanti yaddhetoḥ kuśalaṃ janāḥ|| 4
अर्थ
जिसके भयसे लोग शुभ कर्मोंमें प्रवृत्त होते हैं और जो ब्रह्मादिका भी शासन करनेवाला है, उस सर्वसमर्थ कालका स्वरूप भी आप मुझसे कहिये॥ ४॥✎ 13121995
कालस्येश्वररूपस्य परेषां च परस्य ते।
स्वरूपं बत कुर्वन्ति यद्धेतोः कुशलं जनाः॥ ४
जिसके भयसे लोग शुभ कर्मोंमें प्रवृत्त होते हैं और जो ब्रह्मादिका भी शासन करनेवाला है, उस सर्वसमर्थ कालका स्वरूप भी आप मुझसे कहिये॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.29.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 380) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/29/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1312 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ज्ञान-दृष्टिके → ज्ञानदृष्टिके
#1995 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): श्रमिक → श्रमित