श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.30.24

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

योजनानां सहस्राणि नवतिं नव चाध्वनः।

त्रिभिर्मुहूर्तैर्द्वाभ्यां वा नीतः प्राप्नोति यातनाः॥ २४

yojanānāṃ sahasrāṇi navatiṃ nava cādhvanaḥ|

tribhirmuhūrtairdvābhyāṃ vā nītaḥ prāpnoti yātanāḥ|| 24

अर्थ

यमलोकका मार्ग निन्यानबे हजार योजन है। इतने लम्बे मार्गको दो-ही-तीन मुहूर्तमें तय करके वह नरकमें तरह-तरहकी यातनाएँ भोगता है॥ २४॥

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