श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.30.29

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

अत्रैव नरकः स्वर्ग इति मातः प्रचक्षते।

या यातना वै नारक्यस्ता इहाप्युपलक्षिताः॥ २९

atraiva narakaḥ svarga iti mātaḥ pracakṣate|

yā yātanā vai nārakyastā ihāpyupalakṣitāḥ|| 29

अर्थ

माताजी! कुछ लोगोंका कहना है कि स्वर्ग और नरक तो इसी लोकमें हैं, क्योंकि जो नारकी यातनाएँ हैं, वे यहाँ भी देखी जाती हैं॥ २९॥

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