क्योंकि इस जीवको किसी औरका संग करनेसे ऐसा मोह और बन्धन नहीं होता, जैसा स्त्री और स्त्रियोंके संगियोंका संग करनेसे होता है॥ ३५॥
न तथास्य भवेन्मोहो बन्धश्चान्यप्रसङ्गतः।
योषित्सङ्गाद्यथा पुंसो यथा तत्सङ्गिसंगतः॥ ३५
क्योंकि इस जीवको किसी औरका संग करनेसे ऐसा मोह और बन्धन नहीं होता, जैसा स्त्री और स्त्रियोंके संगियोंका संग करनेसे होता है॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.31.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 393) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/31/35/