श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.32.20

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 32 · अथ द्वात्रिंशोऽध्यायः

दक्षिणेन पथार्यम्णः१ पितृलोकं व्रजन्ति ते२।

प्रजामनु प्रजायन्ते श्मशानान्त३क्रियाकृतः॥ २०

dakṣiṇena pathāryamṇaḥ pitṛlokaṃ vrajanti te|

prajāmanu prajāyante śmaśānāntakriyākṛtaḥ|| 20

अर्थ

गर्भाधानसे लेकर अन्त्येष्टितक सब संस्कारोंको विधिपूर्वक करनेवाले ये सकामकर्मी सूर्यसे दक्षिण ओरके पितृयान या धूममार्गसे पित्रीश्‍वर अर्यमाके लोकमें जाते हैं और फिर अपनी ही सन्ततिके वंशमें उत्पन्‍न होते हैं॥ २०॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—पथा ते तु।

    (मुद्रित पृष्ठ 397)
  2. २

    प्रा० पा०—वै।

    (मुद्रित पृष्ठ 397)
  3. ३

    प्रा० पा०—न्यकृतक्रियाः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 397)

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