य इदं शृणुयादम्ब श्रद्धया पुरुषः सकृत्।
यो वाभिधत्ते मच्चित्तः स ह्येति पदवीं च मे॥ ४३
मा! जो पुरुष मुझमें चित्त लगाकर इसका श्रद्धापूर्वक एक बार भी श्रवण या कथन करेगा, वह मेरे परमपदको प्राप्त होगा॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.32.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 400) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/32/43/