श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.4.28

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

राजोवाच

निधनमुपगतेषु वृष्णिभोजे-

ष्वधिरथयूथपयूथपेषु मुख्यः।

स तु कथमवशिष्ट उद्धवो य-

द्धरिरपि तत्यज आकृतिं त्र्यधीशः॥ २८

nidhanamupagateṣu vṛṣṇibhoje-

ṣvadhirathayūthapayūthapeṣu mukhyaḥ|

sa tu kathamavaśiṣṭa uddhavo ya-

ddharirapi tatyaja ākṛtiṃ tryadhīśaḥ|| 28

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! वृष्णिकुल और भोजवंशके सभी रथी और यूथपतियोंके भी यूथपति नष्ट हो गये थे। यहाँतक कि त्रिलोकीनाथ श्रीहरिको भी अपना वह रूप छोड़ना पड़ा था। फिर उन सबके मुखिया उद्धवजी ही कैसे बच रहे?॥ २८॥

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