meḍhraṃ tasya vinirbhinnaṃ svadhiṣṇyaṃ ka upāviśat|
retasāṃśena yenāsāvānandaṃ pratipadyate|| 19
अर्थ
अब उसके लिंग उत्पन्न हुआ। अपने इस आश्रयमें प्रजापतिने अपने अंश वीर्यके सहित प्रवेश किया, जिससे जीव आनन्दका अनुभव करता है॥ १९॥✎ 220
मेढ्रं तस्य विनिर्भिन्नं स्वधिष्ण्यं क उपाविशत्।
रेतसांशेन येनासावानन्दं प्रतिपद्यते॥ १९
अब उसके लिंग उत्पन्न हुआ। अपने इस आश्रयमें प्रजापतिने अपने अंश वीर्यके सहित प्रवेश किया, जिससे जीव आनन्दका अनुभव करता है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 260) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/6/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#220 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने