अब इसमें चित्त प्रकट हुआ। उसमें चित्तशक्तिके सहित महत्तत्त्व (ब्रह्मा) स्थित हुआ; इस चित्तशक्तिसे जीव विज्ञान (चेतना)-को उपलब्ध करता है॥ २६॥
सत्त्वं चास्य विनिर्भिन्नं महान्धिष्ण्यमुपाविशत्।
चित्तेनांशेन येनासौ विज्ञानं प्रतिपद्यते॥ २६
अब इसमें चित्त प्रकट हुआ। उसमें चित्तशक्तिके सहित महत्तत्त्व (ब्रह्मा) स्थित हुआ; इस चित्तशक्तिसे जीव विज्ञान (चेतना)-को उपलब्ध करता है॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 261) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/6/26/