अतः भगवान्की माया बड़े-बड़े मायावियोंको भी मोहित कर देनेवाली है। उसकी चक्करमें डालनेवाली चाल अनन्त है; अतएव स्वयं भगवान् भी उसकी थाह नहीं लगा सकते, फिर दूसरोंकी तो बात ही क्या है॥ ३९॥✎ 222223224225
अतो भगवतो माया मायिनामपि मोहिनी।
यत्स्वयं चात्मवर्त्मात्मा न वेद किमुतापरे॥ ३९
अतः भगवान्की माया बड़े-बड़े मायावियोंको भी मोहित कर देनेवाली है। उसकी चक्करमें डालनेवाली चाल अनन्त है; अतएव स्वयं भगवान् भी उसकी थाह नहीं लगा सकते, फिर दूसरोंकी तो बात ही क्या है॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 262) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/6/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
#222 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् को → श्रीभगवान्को