भगवन्! आपने कहा कि सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान्ने क्रमशः महदादि तत्त्व और उनके विकारोंको रचकर फिर उनके अंशोंसे विराट्को उत्पन्न किया और इसके पश्चात् वे स्वयं उसमें प्रविष्ट हो गये॥ २१॥✎ 231
सृष्ट्वाग्रे महदादीनि सविकाराण्यनुक्रमात्।
तेभ्यो विराजमुद्धृत्य तमनु प्राविशद्विभुः॥ २१
भगवन्! आपने कहा कि सृष्टिके प्रारम्भमें भगवान्ने क्रमशः महदादि तत्त्व और उनके विकारोंको रचकर फिर उनके अंशोंसे विराट्को उत्पन्न किया और इसके पश्चात् वे स्वयं उसमें प्रविष्ट हो गये॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.7.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 265) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/7/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)