श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.26

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

एतेषामपि वंशांश्‍च वंशानुचरितानि च।

उपर्यधश्‍च ये लोका भूमेर्मित्रात्मजासते॥ २६

eteṣāmapi vaṃśāṃśca vaṃśānucaritāni ca|

uparyadhaśca ye lokā bhūmermitrātmajāsate|| 26

अर्थ

मैत्रेयजी! उन मनुओंके वंश और वंशधर राजाओंके चरित्रोंका, पृथ्वीके ऊपर और नीचेके लोकों तथा भूर्लोकके विस्तार और स्थितिका भी वर्णन कीजिये तथा यह भी बताइये कि तिर्यक्, मनुष्य, देवता, सरीसृप (सर्पादि रेंगनेवाले जन्तु ) और पक्षी तथा जरायुज, स्वेदज, अण्डज और उद्भिज्ज—ये चार प्रकारके प्राणी किस प्रकार उत्पन्‍न हुए ॥ २६-२७॥✎ 231

यह अर्थ श्लोक 26–27 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #231 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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