श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.21

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

यन्‍नाभिपद्मभवनादहमासमीड्य

लोकत्रयोपकरणो यदनुग्रहेण।

तस्मै नमस्त उदरस्थभवाय योग-

निद्रावसानविकसन्‍नलिनेक्षणाय॥ २१

yannābhipadmabhavanādahamāsamīḍya

lokatrayopakaraṇo yadanugraheṇa|

tasmai namasta udarasthabhavāya yoga-

nidrāvasānavikasannalinekṣaṇāya|| 21

अर्थ

आपके नाभिकमलरूप भवनसे मेरा जन्म हुआ है। यह सम्पूर्ण विश्‍व आपके उदरमें समाया हुआ है। आपकी कृपासे ही मैं त्रिलोकीकी रचनारूप उपकारमें प्रवृत्त हुआ हूँ । इस समय योगनिद्राका अन्त हो जानेके कारण आपके नेत्रकमल विकसित हो रहे हैं, आपको मेरा नमस्कार है॥ २१॥✎ 238

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #238 शब्दोंके बीचका स्थान: पुरुषोत्तमभगवान् को → पुरुषोत्तमभगवान्‌को

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