आपके नाभिकमलरूप भवनसे मेरा जन्म हुआ है। यह सम्पूर्ण विश्व आपके उदरमें समाया हुआ है। आपकी कृपासे ही मैं त्रिलोकीकी रचनारूप उपकारमें प्रवृत्त हुआ हूँ । इस समय योगनिद्राका अन्त हो जानेके कारण आपके नेत्रकमल विकसित हो रहे हैं, आपको मेरा नमस्कार है॥ २१॥✎ 238
यन्नाभिपद्मभवनादहमासमीड्य
लोकत्रयोपकरणो यदनुग्रहेण।
तस्मै नमस्त उदरस्थभवाय योग-
निद्रावसानविकसन्नलिनेक्षणाय॥ २१
आपके नाभिकमलरूप भवनसे मेरा जन्म हुआ है। यह सम्पूर्ण विश्व आपके उदरमें समाया हुआ है। आपकी कृपासे ही मैं त्रिलोकीकी रचनारूप उपकारमें प्रवृत्त हुआ हूँ । इस समय योगनिद्राका अन्त हो जानेके कारण आपके नेत्रकमल विकसित हो रहे हैं, आपको मेरा नमस्कार है॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.9.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 275) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/9/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#238 शब्दोंके बीचका स्थान: पुरुषोत्तमभगवान् को → पुरुषोत्तमभगवान्को