श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.42

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अहमात्माऽऽत्मनां धातः प्रेष्ठः सन् प्रेयसामपि।

अतो मयि रतिं कुर्याद्देहादिर्यत्कृते प्रियः॥ ४२

ahamātmā''tmanāṃ dhātaḥ preṣṭhaḥ san preyasāmapi|

ato mayi ratiṃ kuryāddehādiryatkṛte priyaḥ|| 42

अर्थ

विधाता! मैं आत्माओंका भी आत्मा और स्त्री-पुत्रादि प्रियोंका भी प्रिय हूँ। देहादि भी मेरे ही लिये प्रिय हैं। अतः मुझसे ही प्रेम करना चाहिये॥ ४२॥

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