॥ श्रीहरिः ॥
तस्य यक्षपतिर्देवः कुबेरस्त्विडविडासुतः।
रावणः कुम्भकर्णश्च तथान्यस्यां विभीषणः॥ ३७
tasya yakṣapatirdevaḥ kuberastviḍaviḍāsutaḥ|
rāvaṇaḥ kumbhakarṇaśca tathānyasyāṃ vibhīṣaṇaḥ|| 37
अर्थ
विश्रवा मुनिके इडविडाके गर्भसे यक्षराज कुबेरका जन्म हुआ और उनकी दूसरी पत्नी केशिनीसे रावण, कुम्भकर्ण एवं विभीषण उत्पन्न हुए॥ ३७॥
तस्य यक्षपतिर्देवः कुबेरस्त्विडविडासुतः।
रावणः कुम्भकर्णश्च तथान्यस्यां विभीषणः॥ ३७
विश्रवा मुनिके इडविडाके गर्भसे यक्षराज कुबेरका जन्म हुआ और उनकी दूसरी पत्नी केशिनीसे रावण, कुम्भकर्ण एवं विभीषण उत्पन्न हुए॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 408) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/37/