श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.42

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

चित्तिस्त्वथर्वणः पत्‍नी लेभे पुत्रं धृतव्रतम्।

दध्यञ्चमश्‍वशिरसं भृगोर्वंशं निबोध मे॥ ४२

cittistvatharvaṇaḥ patnī lebhe putraṃ dhṛtavratam|

dadhyañcamaśvaśirasaṃ bhṛgorvaṃśaṃ nibodha me|| 42

अर्थ

अथर्वा मुनिकी पत्‍नी चित्तिने दध्यङ् (दधीचि) नामक एक तपोनिष्ठ पुत्र प्राप्त किया, जिसका दूसरा नाम अश्‍वशिरा भी था। अब भृगुके वंशका वर्णन सुनो॥ ४२॥

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