श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.45

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

मार्कण्डेयो मृकण्डस्य प्राणाद्वेदशिरा मुनिः।

कविश्‍च भार्गवो यस्य भगवानुशना सुतः॥ ४५

mārkaṇḍeyo mṛkaṇḍasya prāṇādvedaśirā muniḥ|

kaviśca bhārgavo yasya bhagavānuśanā sutaḥ|| 45

अर्थ

उनमेंसे मृकण्डके मार्कण्डेय और प्राणके मुनिवर वेदशिराका जन्म हुआ। भृगुजीके एक कवि नामक पुत्र भी थे। उनके भगवान् उशना (शुक्राचार्य) हुए॥ ४५॥

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