अप्सराएँ नाचने लगीं। इस प्रकार उस समय बड़ा ही आनन्द-मंगल हुआ तथा ब्रह्मादि समस्त देवता स्तोत्रोंद्वारा भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ५५॥✎ 356
नृत्यन्ति स्म स्त्रियो देव्य आसीत्परममङ्गलम्।
देवा ब्रह्मादयः सर्वे उपतस्थुरभिष्टवैः॥ ५५
अप्सराएँ नाचने लगीं। इस प्रकार उस समय बड़ा ही आनन्द-मंगल हुआ तथा ब्रह्मादि समस्त देवता स्तोत्रोंद्वारा भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 410) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/55/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)