श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.10.14

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

हाहाकारस्तदैवासीत्सिद्धानां दिवि पश्यताम्।

हतोऽयं मानवः सूर्यो मग्नः पुण्यजनार्णवे॥ १४

hāhākārastadaivāsītsiddhānāṃ divi paśyatām|

hato'yaṃ mānavaḥ sūryo magnaḥ puṇyajanārṇave|| 14

अर्थ

उस समय जो सिद्धगण आकाशमें स्थित होकर यह दृश्य देख रहे थे, वे सब हाय-हाय करके कहने लगे—‘आज यक्षसेनारूप समुद्रमें डूबकर यह मानव-सूर्य अस्त हो गया’॥ १४॥

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