श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.11.7

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

मनुरुवाच

अलं वत्सातिरोषेण तमोद्वारेण पाप्मना।

येन पुण्यजनानेतानवधीस्त्वमनागसः॥ ७

alaṃ vatsātiroṣeṇa tamodvāreṇa pāpmanā|

yena puṇyajanānetānavadhīstvamanāgasaḥ|| 7

अर्थ

मनुजीने कहा—बेटा! बस, बस! अधिक क्रोध करना ठीक नहीं। यह पापी नरकका द्वार है। इसीके वशीभूत होकर तुमने इन निरपराध यक्षोंका वध किया है॥ ७॥

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