श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.12.30

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तदोत्तानपदः पुत्रो ददर्शान्तकमागतम्।

मृत्योर्मूर्ध्नि पदं दत्त्वा आरुरोहाद्भुतं गृहम्॥ ३०

tadottānapadaḥ putro dadarśāntakamāgatam|

mṛtyormūrdhni padaṃ dattvā ārurohādbhutaṃ gṛham|| 30

अर्थ

इतनेमें ही ध्रुवजीने देखा कि काल मूर्तिमान् होकर उनके सामने खड़ा है। तब वे मृत्युके सिरपर पैर रखकर उस समय अद्भुत विमानपर चढ़ गये॥ ३०॥

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