नन्द और सुनन्दने ध्रुवके हृदयकी बात जानकर उन्हें दिखलाया कि देवी सुनीति आगे-आगे दूसरे विमानपर जा रही हैं॥ ३३॥
इति व्यवसितं तस्य व्यवसाय सुरोत्तमौ।
दर्शयामासतुर्देवीं पुरो यानेन गच्छतीम्॥ ३३
नन्द और सुनन्दने ध्रुवके हृदयकी बात जानकर उन्हें दिखलाया कि देवी सुनीति आगे-आगे दूसरे विमानपर जा रही हैं॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 471) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/33/