यह साक्षात् भगवद्विषयक अमृतमय ज्ञान है; जो लोग भगवन्मार्गके मर्मसे अनभिज्ञ हैं—उन्हें जो कोई इसे प्रदान करता है, उस दीनवत्सल कृपालु पुरुषपर देवता अनुग्रह करते हैं॥ ५१॥
ज्ञानमज्ञाततत्त्वाय यो दद्यात्सत्पथेऽमृतम्।
कृपालोर्दीननाथस्य देवास्तस्यानुगृह्णते॥ ५१
यह साक्षात् भगवद्विषयक अमृतमय ज्ञान है; जो लोग भगवन्मार्गके मर्मसे अनभिज्ञ हैं—उन्हें जो कोई इसे प्रदान करता है, उस दीनवत्सल कृपालु पुरुषपर देवता अनुग्रह करते हैं॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 473) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/51/