श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.13.14

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

प्रदोषो निशिथो व्युष्ट इति दोषासुतास्त्रयः।

व्युष्टः सुतं पुष्करिण्यां सर्वतेजसमादधे॥ १४

pradoṣo niśitho vyuṣṭa iti doṣāsutāstrayaḥ|

vyuṣṭaḥ sutaṃ puṣkariṇyāṃ sarvatejasamādadhe|| 14

अर्थ

दोषाके प्रदोष, निशीथ और व्युष्ट—ये तीन पुत्र हुए। व्युष्टने अपनी भार्या पुष्करिणीसे सर्वतेजा नामका पुत्र उत्पन्‍न किया॥ १४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें