॥ श्रीहरिः ॥
सुनीथांगस्य या पत्नी सुषुवे वेनमुल्बणम्।
यद्दौःशील्यात्स राजर्षिर्निर्विण्णो निरगात्पुरात्॥ १८
sunīthāṃgasya yā patnī suṣuve venamulbaṇam|
yaddauḥśīlyātsa rājarṣirnirviṇṇo niragātpurāt|| 18
अर्थ
अंगकी पत्नी सुनीथाने क्रूरकर्मा वेनको जन्म दिया, जिसकी दुष्टतासे उद्विग्न होकर राजर्षि अंग नगर छोड़कर चले गये थे॥ १८॥
सुनीथांगस्य या पत्नी सुषुवे वेनमुल्बणम्।
यद्दौःशील्यात्स राजर्षिर्निर्विण्णो निरगात्पुरात्॥ १८
अंगकी पत्नी सुनीथाने क्रूरकर्मा वेनको जन्म दिया, जिसकी दुष्टतासे उद्विग्न होकर राजर्षि अंग नगर छोड़कर चले गये थे॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 474) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/18/