विदुरजीने पूछा—भगवत्परायण मुने! ये प्रचेता कौन थे? किसके पुत्र थे? किसके वंशमें प्रसिद्ध थे और इन्होंने कहाँ यज्ञ किया था?॥ २॥✎ 386
के ते प्रचेतसो नाम कस्यापत्यानि सुव्रत।
कस्यान्ववाये प्रख्याताः कुत्र वा सत्रमासत॥ २
विदुरजीने पूछा—भगवत्परायण मुने! ये प्रचेता कौन थे? किसके पुत्र थे? किसके वंशमें प्रसिद्ध थे और इन्होंने कहाँ यज्ञ किया था?॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 473) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)