यन्न गृह्णन्ति भागान् स्वान् ये देवाः कर्मसाक्षिणः॥ २८
na vidāmeha devānāṃ helanaṃ vayamaṇvapi|
yanna gṛhṇanti bhāgān svān ye devāḥ karmasākṣiṇaḥ|| 28
अर्थ
हमें ऐसी कोई बात नहीं दीखती कि इस यज्ञमें देवताओंका किंचित् भी तिरस्कार हुआ है—फिर भी कर्माध्यक्ष देवतालोग क्यों अपना भाग नहीं ले रहे हैं?’॥ २८॥
न विदामेह देवानां हेलनं वयमण्वपि।
यन्न गृह्णन्ति भागान् स्वान् ये देवाः कर्मसाक्षिणः॥ २८
हमें ऐसी कोई बात नहीं दीखती कि इस यज्ञमें देवताओंका किंचित् भी तिरस्कार हुआ है—फिर भी कर्माध्यक्ष देवतालोग क्यों अपना भाग नहीं ले रहे हैं?’॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 475) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/28/