सदस्योंने कहा—राजन्! इस जन्ममें तो आपसे तनिक भी अपराध नहीं हुआ; हाँ, पूर्वजन्मका एक अपराध अवश्य है, जिसके कारण आप ऐसे सर्वगुणसम्पन्न होनेपर भी पुत्रहीन हैं॥ ३१॥✎ 1601
नरदेवेह भवतो नाघं तावन्मनाक् स्थितम्।
अस्त्येकं प्राक्तनमघं यदिहेदृक् त्वमप्रजः॥ ३१
सदस्योंने कहा—राजन्! इस जन्ममें तो आपसे तनिक भी अपराध नहीं हुआ; हाँ, पूर्वजन्मका एक अपराध अवश्य है, जिसके कारण आप ऐसे सर्वगुणसम्पन्न होनेपर भी पुत्रहीन हैं॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 476) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/31/