अग्निमें आहुति डालते ही अग्निकुण्डसे सोनेके हार और शुभ्र वस्त्रोंसे विभूषित एक पुरुष प्रकट हुए; वे एक स्वर्णपात्रमें सिद्ध खीर लिये हुए थे॥ ३६॥
तस्मात्पुरुष उत्तस्थौ हेममाल्यमलाम्बरः।
हिरण्मयेन पात्रेण सिद्धमादाय पायसम्॥ ३६
अग्निमें आहुति डालते ही अग्निकुण्डसे सोनेके हार और शुभ्र वस्त्रोंसे विभूषित एक पुरुष प्रकट हुए; वे एक स्वर्णपात्रमें सिद्ध खीर लिये हुए थे॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 476) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/36/