वेनने कहा—तुमलोग बड़े मूर्ख हो! खेद है, तुमने अधर्ममें ही धर्मबुद्धि कर रखी है। तभी तो तुम जीविका देनेवाले मुझ साक्षात् पतिको छोड़कर किसी दूसरे जारपतिकी उपासना करते हो॥ २३॥
बालिशा बत यूयं वा अधर्मे धर्ममानिनः।
ये वृत्तिदं पतिं हित्वा जारं पतिमुपासते॥ २३
वेनने कहा—तुमलोग बड़े मूर्ख हो! खेद है, तुमने अधर्ममें ही धर्मबुद्धि कर रखी है। तभी तो तुम जीविका देनेवाले मुझ साक्षात् पतिको छोड़कर किसी दूसरे जारपतिकी उपासना करते हो॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 480) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/14/23/