श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.14.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अराजकभयादेष कृतो राजातदर्हणः।

ततोऽप्यासीद्भयं त्वद्य कथं स्यात्स्वस्ति देहिनाम्॥ ९

arājakabhayādeṣa kṛto rājātadarhaṇaḥ|

tato'pyāsīdbhayaṃ tvadya kathaṃ syātsvasti dehinām|| 9

अर्थ

हमने अराजकताके भयसे ही अयोग्य होनेपर भी वेनको राजा बनाया था; किन्तु अब उससे भी प्रजाको भय हो गया। ऐसी अवस्थामें प्रजाको किस प्रकार सुख-शान्ति मिल सकती है?॥ ९॥✎ 1602

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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