॥ श्रीहरिः ॥
तस्याभिषेक आरब्धो ब्राह्मणैर्ब्रह्मवादिभिः।
आभिषेचनिकान्यस्मै आजह्रुः सर्वतो जनाः॥ ११
tasyābhiṣeka ārabdho brāhmaṇairbrahmavādibhiḥ|
ābhiṣecanikānyasmai ājahruḥ sarvato janāḥ|| 11
अर्थ
वेदवादी ब्राह्मणोंने महाराज पृथुके अभिषेकका आयोजन किया। सब लोग उसकी सामग्री जुटानेमें लग गये॥ ११॥
तस्याभिषेक आरब्धो ब्राह्मणैर्ब्रह्मवादिभिः।
आभिषेचनिकान्यस्मै आजह्रुः सर्वतो जनाः॥ ११
वेदवादी ब्राह्मणोंने महाराज पृथुके अभिषेकका आयोजन किया। सब लोग उसकी सामग्री जुटानेमें लग गये॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.15.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 483) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/15/11/