श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.15.11

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

तस्याभिषेक आरब्धो ब्राह्मणैर्ब्रह्मवादिभिः।

आभिषेचनिकान्यस्मै आजह्रुः सर्वतो जनाः॥ ११

tasyābhiṣeka ārabdho brāhmaṇairbrahmavādibhiḥ|

ābhiṣecanikānyasmai ājahruḥ sarvato janāḥ|| 11

अर्थ

वेदवादी ब्राह्मणोंने महाराज पृथुके अभिषेकका आयोजन किया। सब लोग उसकी सामग्री जुटानेमें लग गये॥ ११॥

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