॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.15.8
शङ्खतूर्यमृदंगाद्या नेदुर्दुन्दुभयो दिवि।
तत्र सर्व उपाजग्मुर्देवर्षिपितृणां गणाः॥ ८
śaṅkhatūryamṛdaṃgādyā nedurdundubhayo divi|
tatra sarva upājagmurdevarṣipitṛṇāṃ gaṇāḥ|| 8
अर्थ
आकाशमें शंख, तुरही, मृदंग और दुन्दुभि आदि बाजे बजने लगे। समस्त देवता, ऋषि और पितर अपने-अपने लोकोंसे वहाँ आये॥ ८॥