श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.16.26

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

तत्र तत्र गिरस्तास्ता इति विश्रुतविक्रमः।

श्रोष्यत्यात्माश्रिता गाथाः पृथुः पृथुपराक्रमः॥ २६

tatra tatra girastāstā iti viśrutavikramaḥ|

śroṣyatyātmāśritā gāthāḥ pṛthuḥ pṛthuparākramaḥ|| 26

अर्थ

इस प्रकार जब इनके पराक्रम जनताके सामने आ जायँगे, तब ये परमपराक्रमी महाराज जहाँ-तहाँ अपने चरित्रकी ही चर्चा सुनेंगे॥ २६॥✎ 1604

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1604 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: बातों-की-बातमें → बातोंकी-बातमें

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