श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.24

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

त्वं खल्वोषधिबीजानि प्राक् सृष्टानि स्वयम्भुवा।

न मुंचस्यात्मरुद्धानि मामवज्ञाय मन्दधीः॥ २४

tvaṃ khalvoṣadhibījāni prāk sṛṣṭāni svayambhuvā|

na muṃcasyātmaruddhāni māmavajñāya mandadhīḥ|| 24

अर्थ

तू नासमझ है, तूने पूर्वकालमें ब्रह्माजीके उत्पन्‍न किये हुए अन्‍नादिके बीजोंको अपनेमें लीन कर लिया है और अब मेरी भी परवा न करके उन्हें अपने गर्भसे निकालती नहीं॥ २४॥✎ 393 394 395 396 397 398 399

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (7)
  • #393 शब्दोंके बीचका स्थान: जोदुष्ट → जो दुष्ट
  • #394 शब्दोंके बीचका स्थान: गर्भसेनिकालती → गर्भसे निकालती
  • #395 शब्दोंके बीचका स्थान: कियेहुए → किये हुए
  • #396 शब्दोंके बीचका स्थान: करनेपरतुझे → करनेपर तुझे
  • #397 शब्दोंके बीचका स्थान: औरअपने → और अपने
  • #398 शब्दोंके बीचका स्थान: तूजो → तू जो
  • #399 शब्दोंके बीचका स्थान: भागतो → भाग तो

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