श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.3

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

विदुर उवाच

कस्माद्दधार गोरूपं धरित्री बहुरूपिणी।

यां दुदोह पृथुस्तत्र को वत्सो दोहनं च किम्॥ ३

kasmāddadhāra gorūpaṃ dharitrī bahurūpiṇī|

yāṃ dudoha pṛthustatra ko vatso dohanaṃ ca kim|| 3

अर्थ

विदुरजीने पूछा—ब्रह्मन्! पृथ्वी तो अनेक रूप धारण कर सकती है, उसने गौका रूप ही क्यों धारण किया? और जब महाराज पृथुने उसे दुहा, तब बछड़ा कौन बना? और दुहनेका पात्र क्या हुआ?॥ ३॥✎ 1328

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1328 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): सनत्कुमार-जीसे → सनत्कुमारजीसे

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