yāṃ dudoha pṛthustatra ko vatso dohanaṃ ca kim|| 3
अर्थ
विदुरजीने पूछा—ब्रह्मन्! पृथ्वी तो अनेक रूप धारण कर सकती है, उसने गौका रूप ही क्यों धारण किया? और जब महाराज पृथुने उसे दुहा, तब बछड़ा कौन बना? और दुहनेका पात्र क्या हुआ?॥ ३॥✎ 1328
कस्माद्दधार गोरूपं धरित्री बहुरूपिणी।
यां दुदोह पृथुस्तत्र को वत्सो दोहनं च किम्॥ ३
विदुरजीने पूछा—ब्रह्मन्! पृथ्वी तो अनेक रूप धारण कर सकती है, उसने गौका रूप ही क्यों धारण किया? और जब महाराज पृथुने उसे दुहा, तब बछड़ा कौन बना? और दुहनेका पात्र क्या हुआ?॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.17.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 489) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/17/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1328 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): सनत्कुमार-जीसे → सनत्कुमारजीसे