mayaṃ prakalpya vatsaṃ te duduhurdhāraṇāmayīm|| 20
अर्थ
किम्पुरुषादि अन्य मायावियोंने मयदानवको बछड़ा बनाया तथा अन्तर्धान होना, विचित्र रूप धारण कर लेना आदि संकल्पमयी मायाओंको दुग्धरूपसे दुहा॥ २०॥✎ 400
अन्ये च मायिनो मायामन्तर्धानाद्भुतात्मनाम्।
मयं प्रकल्प्य वत्सं ते दुदुहुर्धारणामयीम्॥ २०
किम्पुरुषादि अन्य मायावियोंने मयदानवको बछड़ा बनाया तथा अन्तर्धान होना, विचित्र रूप धारण कर लेना आदि संकल्पमयी मायाओंको दुग्धरूपसे दुहा॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 494) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/18/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)