॥ श्रीहरिः ॥
तथाहयो दन्दशूकाः सर्पा नागाश्च तक्षकम्।
विधाय वत्सं दुदुहुर्बिलपात्रे विषं पयः॥ २२
tathāhayo dandaśūkāḥ sarpā nāgāśca takṣakam|
vidhāya vatsaṃ duduhurbilapātre viṣaṃ payaḥ|| 22
अर्थ
बिना फनवाले साँप, फनवाले साँप, नाग और बिच्छू आदि विषैले जन्तुओंने तक्षकको बछड़ा बनाकर मुखरूप पात्रमें विषरूप दूध दुहा॥ २२॥
तथाहयो दन्दशूकाः सर्पा नागाश्च तक्षकम्।
विधाय वत्सं दुदुहुर्बिलपात्रे विषं पयः॥ २२
बिना फनवाले साँप, फनवाले साँप, नाग और बिच्छू आदि विषैले जन्तुओंने तक्षकको बछड़ा बनाकर मुखरूप पात्रमें विषरूप दूध दुहा॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 495) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/18/22/