nivāsān kalpayāṃcakre tatra tatra yathārhataḥ|| 30
अर्थ
वे पिताके समान अपनी प्रजाके पालन-पोषणकी व्यवस्थामें लगे हुए थे। उन्होंने इस समतल भूमिमें प्रजावर्गके लिये जहाँ-तहाँ यथायोग्य निवासस्थानोंका विभाग किया॥ ३०॥
अथास्मिन् भगवान् वैन्यः प्रजानां वृत्तिदः पिता।
निवासान् कल्पयांचक्रे तत्र तत्र यथार्हतः॥ ३०
वे पिताके समान अपनी प्रजाके पालन-पोषणकी व्यवस्थामें लगे हुए थे। उन्होंने इस समतल भूमिमें प्रजावर्गके लिये जहाँ-तहाँ यथायोग्य निवासस्थानोंका विभाग किया॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 495) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/18/30/