श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.19.16

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

एवं वैन्यसुतः प्रोक्तस्त्वरमाणं विहायसा।

अन्वद्रवदभिक्रुद्धो रावणं३ गृध्रराडिव॥ १६

evaṃ vainyasutaḥ proktastvaramāṇaṃ vihāyasā|

anvadravadabhikruddho rāvaṇaṃ gṛdhrarāḍiva|| 16

अर्थ

अत्रि मुनिके इस प्रकार उत्साहित करनेपर पृथुकुमार क्रोधमें भर गया। इन्द्र बड़ी तेजीसे आकाशमें जा रहे थे। उनके पीछे वह इस प्रकार दौड़ा, जैसे रावणके पीछे जटायु॥ १६॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—गृध्रराडिव रावणम्।

    (मुद्रित पृष्ठ 497)

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