श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.19.20

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

अत्रिः सन्दर्शयामास त्वरमाणं विहायसा।

कपालखट्वांगधरं वीरो नैनमबाधत॥ २०

atriḥ sandarśayāmāsa tvaramāṇaṃ vihāyasā|

kapālakhaṭvāṃgadharaṃ vīro nainamabādhata|| 20

अर्थ

अत्रि मुनिने फिर उन्हें आकाशमें तेजीसे जाते दिखा दिया, किन्तु उनके पास कपाल और खट्वांग देखकर पृथुपुत्रने उनके मार्गमें कोई बाधा न डाली॥ २०॥✎ 402 403

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #402 शब्दोंके बीचका स्थान: होजाते → हो जाते
  • #403 शब्दोंके बीचका स्थान: उपधर्ममात्रहैं। → उपधर्ममात्र हैं।

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