उनके बाल बारीक, घुँघराले, काले और चिकने थे; गरदन शंखके समान उतार-चढ़ाववाली तथा रेखाओंसे युक्त थी और वे उत्तम बहुमूल्य धोती पहने और वैसी ही चादर ओढ़े थे॥ १७॥✎ 1332
सूक्ष्मवक्रासितस्निग्धमूर्धजः कम्बुकन्धरः।
महाधने दुकूलाग्र्ये परिधायोपवीय च॥ १७
उनके बाल बारीक, घुँघराले, काले और चिकने थे; गरदन शंखके समान उतार-चढ़ाववाली तथा रेखाओंसे युक्त थी और वे उत्तम बहुमूल्य धोती पहने और वैसी ही चादर ओढ़े थे॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.21.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 507) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/21/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1332 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नक्षत्र-मण्डलमें → नक्षत्रमण्डलमें