इस लोकमें मुझे प्रजाजनोंका शासन, उनकी रक्षा, उनकी आजीविकाका प्रबन्ध तथा उन्हें अलग-अलग अपनी मर्यादामें रखनेके लिये राजा बनाया गया है॥ २२॥✎ 408
अहं दण्डधरो राजा प्रजानामिह योजितः।
रक्षिता वृत्तिदः स्वेषु सेतुषु स्थापिता पृथक्॥ २२
इस लोकमें मुझे प्रजाजनोंका शासन, उनकी रक्षा, उनकी आजीविकाका प्रबन्ध तथा उन्हें अलग-अलग अपनी मर्यादामें रखनेके लिये राजा बनाया गया है॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.21.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 508) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/21/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)