श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.23.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

सनत्कुमारो भगवान् यदाहाध्यात्मिकं परम्।

योगं तेनैव पुरुषमभजत्पुरुषर्षभः॥ ९

sanatkumāro bhagavān yadāhādhyātmikaṃ param|

yogaṃ tenaiva puruṣamabhajatpuruṣarṣabhaḥ|| 9

अर्थ

तब, भगवान् सनत्कुमारने उन्हें जिस परमोत्कृष्ट अध्यात्मयोगकी शिक्षा दी थी, उसीके अनुसार राजा पृथु पुरुषोत्तम श्रीहरिकी आराधना करने लगे॥ ९॥

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