जब पिताने उन्हें सन्तान उत्पन्न करनेका आदेश दिया, तब उन सबने तपस्या करनेके लिये समुद्रमें प्रवेश किया। वहाँ दस हजार वर्षतक तपस्या करते हुए उन्होंने तपका फल देनेवाले श्रीहरिकी आराधना की॥ १४॥✎ 1606
पित्राऽऽदिष्टाः प्रजासर्गे तपसेऽर्णवमाविशन्।
दशवर्षसहस्राणि तपसाऽऽर्चंस्तपस्पतिम्॥ १४
जब पिताने उन्हें सन्तान उत्पन्न करनेका आदेश दिया, तब उन सबने तपस्या करनेके लिये समुद्रमें प्रवेश किया। वहाँ दस हजार वर्षतक तपस्या करते हुए उन्होंने तपका फल देनेवाले श्रीहरिकी आराधना की॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 525) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)