श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.30

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अथ भागवता यूयं प्रियाः स्थ भगवान् यथा।

न मद्भागवतानां च प्रेयानन्योऽस्ति कर्हिचित्॥ ३०

atha bhāgavatā yūyaṃ priyāḥ stha bhagavān yathā|

na madbhāgavatānāṃ ca preyānanyo'sti karhicit|| 30

अर्थ

तुमलोग भगवद्भक्त होनेके नाते मुझे भगवान्‌के समान ही प्यारे हो। इसी प्रकार भगवान्‌के भक्तोंको भी मुझसे बढ़कर और कोई कभी प्रिय नहीं होता॥ ३०॥

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